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Do Bailon Ki Katha | Premchand

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3 reviews for Do Bailon Ki Katha | Premchand

  1. Achalesh tripathi

    दो बैलों की कथा,
    नाम सुन के तो लगता है जैसे कोई बच्चो की कहानी होंगी। शुरुवात मे दो बैलो का इंसानों जैसे बात करना थोड़ा सा अटपटा जरूर लग सकता है। परन्तु मानवीकरण से जो सन्देश मिलेगा वह आपको जरूर अंदर से झकझोर देगा। यह कहानी आपको बताएगी की इंसान हो या पशु, दोनों मे उतनी ही संवेदनशीलता होती है। साथ ही अगर हम मिल के कोई कार्य करे तो कुछ भी मुश्किल नहीं। एक बार पढ़ के देखें, शायद मेरे शब्द जो कम पड़े हों, वो कसर भी पूरी हो जाये।
    Dhanyawaad

  2. shivammathers

    बहुत ही अच्छे से इस कहानी मे दो बैलो को आम इंसानो जैसे बात करता दिखाया गया है, कैसे ये दो बैल हिंदी भाषा मे एक दूसरे से बात करते है, पशुओं की मानसिकता, उनकी इच्छाओं को दर्शाती ये कथा दो बैलो की है जो अपने मालिक से बचके भागना चाहते है। युवा पीढ़ी को यह कथा जरूर पढ़नी चाहिए।

  3. Naglash

    प्रेमचंद जी की एक उत्तम रचना जिसमें दो बैलो को इंसानों की तरह अपनी समस्याओं को एक दूसरे से बांटते दिखाया गया है, बहुत ही उत्तम तरीके से उनकी संवेदनाओं को प्रेमचंद जी ने प्रस्तुत किया है ,जरूर पढ़नी चाहिए ये कहानी

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