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Gulli Danda | Premchand

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4 reviews for Gulli Danda | Premchand

  1. Vikram Singh Negi (verified owner)

    कलम के जादूगर की एक बेहतरीन कहानी । दो मित्रों जो बचपन में साथ-साथ गुल्ली डंडा खेलते थे और जीवन में जब उनके पद और पहचान बदल बदल जाती है ,तब उनके मनोभावों और खेल के विभिन्न पहलुओं को उजागर करती हृदयस्पर्शी कहानी । मुंशी प्रेमचंद जी की कहानियों में मित्रता के मर्म और संगम को जीवन के विभिन्न स्तरों पर प्रस्तुत करनी यह कहानी हर पाठक को अवश्य पढ़नी चाहिए ।

  2. Naglash

    प्रेमचंद जी की हर कहानी की तरह ये भी एक बेहतरीन कहानी है, ये ऐसे दो दोस्तों की कहानी है जो बचपन मे साथ मे एक खेल खेला करते थे जिसका नाम था गुल्ली डंडा, जब जीवन में दोनों आगे बढ़ जाते हैं उसके बाद कैसे आगे बढ़ती है कहानी उसे बहुत खूबसूरत तरह से लिखा है

  3. shivammathers

    स्कूल की हिंदी की किताब मे पढ़ी गयी एक ओर कहानी। मुंशी प्रेमचंद की यह कहानी एक छोटे से गांव के दो दोस्तों की कहानी हैं जो बचपन मे गिल्ली डंडा का खेल खेलते थे। वक़्त के साथ बड़े होते हुए दोनों की ज़िंदगी ने किस प्रकार का मोड़ लिया वह इस कहानी मे बतया गया है, किस प्रकार गिल्ली डंडे के खेल को दोनों दोस्तो की ज़िंदगी से जोड़ा गया है वह पढ़ने लायक है।

  4. 454MOHIT

    गिल्ली डंडा मेरा बचपन का सबसे प्रिय खेल जिसमे एक खिलाड़ी डंडे से गिल्ली को मरता है दूसरा उसे पकडने का प्रयास करता है वैसे ये खेल बचपन मे लगभग सभी ने खेला होगा मगर क्या कभी किसी किताब में कहानी पढ़ कर महसूस किया है यदि नही तो जरूर करे मुन्सी प्रेमचंद की ये कहानी इसमे दोस्ती है तो अमीर गरीब का भेद भी प्यार है तो अपनी पहुंच का अकड़ भी ❤️❤️❤️❤️

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