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Kajaki | Premchand

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3 reviews for Kajaki | Premchand

  1. Naglash

    कजाकी एक डाकिया और पोस्टमॉस्टर के बेटे के भावनात्मक जुड़ाव की कहानी है ,कजाकी का बच्चे के लिए हिरण का बच्चा लाना व बच्चे का कजाकी की नौकरी चले जाने के बाद खाने के बारे में सोचना और उसके लिए आटा लेकर जाना काफी भावनात्मक है

  2. shivammathers

    कजाकी नाम का एक पासी डाकिया था। लेखक के बचपन मे कजाकी उसका एक अच्छा दोस्त बन चुका था। लेखक भी कजाकी से उतना ही स्नेह करता था। एक समय काम पर देरी से पुहचने से कजाकी अपनी नौकरी गवा देता है परंतु उसे देरी इस वजह से होती है क्योंकि वह एक हिरण के बच्चे को पकड़ रहा होता है वह भी लेखक के लिए। लेखक कजाकी की नौकरी जाने की वजह अपने आप को समझता है। स्नेह के भाव से भरी ये कहानी जरूर पढ़ें।

  3. Sourabh Sahu

    Ise padhkar pata chala ki Premchand ji ne ek ais rishte ko itni aatmiyata ke sath likha hai jo rishte ma na to khun ka hai, na sagaa hai, na hi koi dost hai, ye in sab se hat ke hai ek aise rishte ki kahani jo aksar ek nishchal mann wale bachche aur nishchal man wale ek bade me hoti hai. Dono to waise hamesha sath nahi rahte lekin kuch palo ke liye milkar ho khushi dono ko milti hai usi ko is kahani me piroya hai

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