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Poos Ki Raat | Premchand

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3 reviews for Poos Ki Raat | Premchand

  1. Vikram Singh Negi

    एक गरीब किसान हल्कू की कहानी जो कि पूस के महीने की भयंकर ठंड में किस प्रकार रात गुजारता है जबकि वह खेत में फसलों की सुरक्षा हेतु रात में खेत में पहरा दे रहा होता है ।उसके मन में उठते भाव,अपनी परिस्थिति,फसल के बारे में आर्थिक सोच,अपने कुत्ते झबरा के प्रति भाव ,सर्द रात में उसकी व्याकुलता इन सब चीजों को प्रेमचन्द जी ने कितनेे अदभुत तरीके से प्रस्तुत किया है ।कहानी बचपन में संभवत किसी कक्षा में भी हिन्दी पाठ्यक्रम में थी और समाज के निर्धन किसानों की स्थिति, जमींदारी प्रथा में चित्रित करती है ।प्रेमचन्द जी ने अपनी कहानी के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्ग का बड़ा ही मार्मिक चित्रण किया है । उनकी कहाँनियाँँ अवश्य पढ़ी जानी चाहिए जो कि मनुष्य में उच्च मानवीय गुणों को विकसित करने में भी सहायक हैं । बच्चों एवं बड़ों दोनों के लिए समान रूप से उपयोगी पुस्तक । अवश्य पढ़ेंं ।

  2. Naglash

    प्रेमचंद जी की ये कहानी सच में बहुत भावनात्मक है ,एक गरीब किसान सर्द रात में कैसे अपने खेतों को बचाने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से लड़ता है ये दर्शाया गया है साथ ही एक गरीब किसान किस मजबूरी में अपना जीवन बिताता है ये भी दिखाया गया है

  3. Gireesh Dewangan

    शीर्षक- पूस की रात
    लेखक- मुंशी प्रेमचंद
    पूस की रात हमारे स्कूल की किताब में थी, तब हमने पहली बार पढी थी. प्रेमचंद जी की रचनाएँ अमीर गरीब हर वर्ग का सटीक चित्रण करती है. इस कहानी में भी एक गरीब किसान के मनोभावों को सटीकता से प्रदर्शित किया गया है.
    हिन्दी महीने के अनुसार पूस का महीना सबसे ठंडा होता है. इतनी कडाके की ठण्ड पड़ती है की शाम ढलते ही घर से निकलना मुश्किल होता है. पर एक गरीब किसान हल्कू अपने खेत की रखवाली करने के लिए वहां रात गुजारता है. क्यूंकि इसी खेत के सहारे वो अपने परिवार का पेट पालता है. ये कहानी 1 रात की है जब ठण्ड बहुत ज्यादा है, और हल्कू का साथ देने के लिए उसके साथ उसका कुत्ता झबरा है.
    उस 1 रात में हल्कू और झबरा पे क्या बीतती है ये इस कहानी में बताया गया है.

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