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Ramleela | Premchand

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3 reviews for Ramleela | Premchand

  1. Naglash

    रामलीला एक वृद्ध के अपने जमाने की रामलीला याद करने की कहानी है,क्यों उन्हें आज की रामलीला पसंद नही आई और रामलीला ,राजतिलक और विदाई के बाद रामलीला के रामचंद्र के साथ क्या बर्ताव होता जी उसके मार्मिक दृश्य दिखाया गया है

  2. Ishan kumar

    रामलीला मुंसी प्रेमचंद की चर्चित कहानी है। कहानी पढ़ कर जिन्दगी के सच्चे अनूभवो को महसूस किया जा सकता है। कहानी के मुख्य पात्र यह बताते है की बचपन में रामलीला देखने में जितना आनन्द आता था अब उतना आनन्द नही आता। बचपन में आनन्द से ज्यादा उन्मांद था रामलीला के प्रति। इस कहानी में यह बताया गया है की समाज की यही सच्चाई यही है की जरुरतमंदो को किसी तरह की मदद नही मिलती पर अपने निकृष्ट शौक को पूरा करने के लिए लोग बेतहाशा खर्च करते है और इसमे अपनी शान समझते है।
    रामलीला समाप्त होने पर रामलीला के पात्रो को घर लौटने का किराया तक नही मिला ।लोग रामलीला की आरती की थाली में एक दो आना भी नही देना चाहते परंतु वही लोग वेशियओ के पीछे खुलकर रुपिया, असर्फिया लुटाते है। जिन्दगी की यही सचाई को इस कहानी में दर्शाया गया है।

  3. shivammathers

    मुंशी प्रेमचंद जी की बहुचर्चित कहानी रामलीला। कहानी का मुख्य पात्र अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए सोचता है कि आजकल की रामलीला मे तो हँसी आती है, मजा नही आता। सब हूहू करते है। अपने बचपन की रामलीला याद करते करते सोचते है के उस समय कितना मजा आता था, रामचंद्र जी के विमान पर बैठने का मौका मिलता था, खूब मस्ती मौज होती थी। कहानी मे हास्य के साथ साथ समाज की असलियत को भी दर्शया गया है, कैसे पूजा की आरती मे एक रुपया देने पर लोग झिकझिक करते थे पर वही आबादीजान नाम की वैश्या को ना जाने कितनी अशर्फियां देते थे। पत्र के पिताजी जो कि दरोगा है वह भी अपना रुतबा दिखा के आरती में पैसे नही देते पर आबादी को एक अशर्फी दे देते है। रामलीला खत्म होने के बाद ना ही रामचंद्र और उनके साथियों को ना कुछ राह खर्च मिलता है ना ही कुछ खाने को, पैदल घर वापस जाना पड़ता है सो अलग। समाज की इस सच्चाई को बतलाते हुए लेखक ने रामलीला के कलाकरो की व्यथा दर्शाई है।

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