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Nirmla | Premchand

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1 review for Nirmla | Premchand

  1. GireeshChandra Dewangan

    शीर्षक- निर्मला
    लेखक- मुंशी प्रेमचंद
    आजादी से पहले के भारत की आम जनता की विचारधारा और और सामाजिक कुरीतियों के बारे में प्रेमचंद जी ने अपनी कई कहानियों में लिखा है. निर्मला में प्रेमचंद जी ने उन कुरीतियों में से बाल विवाह, दहेज़ प्रथा और लोगो में आर्थिक और सामाजिक असमानता के बारे में लिखा है. उन्होंने ने निर्मला में ये भी बताया है की उन कुरीतियों का कितना घातक परिणाम हो सकता है.
    निर्मला कहानी है एक 15 वर्षीय बालिका की जिसके पिता की असामयिक मृत्यु की वजह से उसका तय रिश्ता टूट जाता है. गरीबी में मजबूर होकर उसकी माँ निर्मला का विवाह उससे २० वर्ष बड़े तोताराम से कर देती हैं, जिनके 3 पुत्र पहली शादी से हैं और बड़ा पुत्र 16 वर्ष का हो चूका है. इस बेमेल शादी का क्या अंजाम होता है. निर्मला को किन दुखों का सामना करना पड़ता है उसका बहुत करुणामय वर्णन प्रेमचंद जी ने इस किताब में किया है.
    एक लेखक का कार्य सिर्फ मनोरंजन करना नहीं होता. उनका काम होता है समाज में व्याप्त कुरीतियों को न सिर्फ लोगों के ध्यान में लाना, बल्कि उसका बुरा पक्ष दिखाना की क्यों ये कुरीतियाँ घातक हैं. प्रेमचंद जी ने अपनी रचनाओं के व्दारा ये बहुत अच्छे से दिखाया है. दुःख की बात ये है की लेखक लगभग १०० साल पहले जिन कुरीतियों की समाप्ति के लिए लिखा था उनमें से कई आज भी व्याप्त हैं.
    निर्मला प्रेमचंद जी के अन्य उपन्यासों की अपेक्षा कम पेजों की है. इसलिए अगर किन्ही को उपन्यास थोड़े बड़े लगते हों तो इससे प्रारंभ कर सकते हैं. साहित्य प्रेमियों के लिए ये किताब संग्रहणीय है.

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